निश्छल समर्पण – शिशिर मधुकर

दो जिस्मों का एक जान हो जाना कोई आसां नहीं
इसके लिए तो छोड़नी पड़ती है अपनी सारी खुदी
जब तुम्हारे दिल में होता है सदा निश्छल समर्पण
ऐसे रिश्ते पर ही तो सब करते हैं श्रद्धा पुष्प अर्पण.

शिशिर मधुकर

10 Comments

  1. babucm 04/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 04/05/2016
  2. Hitesh Kumar Sharma 04/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 04/05/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 04/05/2016
    • Shishir "Madhukar" 04/05/2016
  4. sarvajit singh 04/05/2016
  5. Shishir "Madhukar" 04/05/2016
  6. Abhishek Rajhans 05/05/2016
  7. Shishir "Madhukar" 05/05/2016

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