१४.क्यूँ रूठ गये हमसे……………..|गीत| “मनोज कुमार”

परम पूज्य स्व. दादा जी याद में…………………..

क्यूँ रूठ गये हमसे क्यूँ दूर गये हमसे
क्या भूल हुई हमसे क्यूँ बिछड़ गये हमसे………………………

इस दिल के थे अजीज महँगा गहना कोई तुम थे
क्या दुनिया वो इससे अच्छी जहाँ चले गये तुम थे
हमें याद बहुत तुम आते हमको जब दिखते चश्में
क्या करके वादा आये थे जल्द आने का रब से

क्यूँ रूठ गये हमसे क्यूँ दूर गये हमसे
क्या भूल हुई हमसे क्यूँ बिछड़ गये हमसे………………………

सारी उम्र में खोजूँगा धुंधली सी इन तस्वीरों में
रह गये अकेले हम तुम कर गये अपाहिज से
अश्रुधार रुके अब नाही अम्बर भीग रहे तन के
थी बड़ी कयामत रैन ले गयी छीन तुम्हें हमसे

क्यूँ रूठ गये हमसे क्यूँ दूर गये हमसे
क्या भूल हुई हमसे क्यूँ बिछड़ गये हमसे………………………

आकाश कुसुम थे कोई घर के कल्पवृक्ष तुम थे
उन्मुक्त जिये सारे जीवन स्वछंद रहे मन से
कोई बैर बुराई ना थी कभी ना किये झगड़े
बनकर के निर्मोही रिश्ता तोड़ गये जगसे

क्यूँ रूठ गये हमसे क्यूँ दूर गये हमसे
क्या भूल हुई हमसे क्यूँ बिछड़ गये हमसे………………………

“मनोज कुमार”

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 01/05/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 01/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/05/2016
  4. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 02/05/2016

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