ज़िन्दगी…

कोई “आजाद” है तो कहीं कोई “गुलाम” है
“मातम” है कहीं तो, कहीं खुशियों के “जाम”हैं
भटक रहा कोई किसी की “तलाश” में
ज़िन्दगी गुज़र रही किसी की “काश” में
कोई होश में “बेहोश”तो कोई जश्ने “जोश” में
“हालात” से हारा तो कोई डूबा है “रोष”में हर एक यहाँ “रागे” अपना “आलाप” है
झूठ यहाँ “अंजू”सच का भी “बाप” है।

11 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 30/04/2016
    • Archana mehta 01/05/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 01/05/2016
    • Archana mehta 01/05/2016
  3. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 01/05/2016
    • Archana mehta 01/05/2016
  4. babucm 02/05/2016
    • Archana mehta 02/05/2016
  5. Madhu tiwari 04/12/2016
  6. Manjusha 04/12/2016
    • Archana mehta 08/12/2016

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