मेरी निशां बाकी रहे…

कुछ यूँ बसा लो मुझे खुद में ऐसे
जीवन संग बंधी सांसो की डोर जैसे
गर फन्ना हो भी जाये मेरी हस्ती तो
तुझ में मेरी निशां बाकी रहे

…इंदर भोले नाथ…
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6 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 28/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" 28/04/2016
  3. sarvajit singh 28/04/2016
  4. MANOJ KUMAR 28/04/2016
  5. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 29/04/2016
  6. babucm 29/04/2016

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