निगाहें – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

निगाहें

कातिल निगाहों से ना देखो ऐसे
के कहीं हम मर ही ना जायें ……………..
अभी तो वादा किया था तुमने
उम्र भर साथ निभाने का ……………………

शायर : सर्वजीत सिंह
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8 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
    • sarvajit singh 27/04/2016
    • babucm 28/04/2016
      • sarvajit singh 28/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" 27/04/2016
    • sarvajit singh 27/04/2016
  3. babucm 28/04/2016
  4. sarvajit singh 22/09/2017

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