बात सिर्फ तुमसे

तुम को हम हमसे छुपाएं तो छुपाएं कैसे…
तुम मेरी शाम-ओ-सहर हो…तो भुलाएं कैसे….

याद बस याद ही होती तो दफ़न कर दूँ उसे…
दिल में तुम हो तो…फिर इस दिल को जलाएं कैसे….

हुकुम तेरा मुझे अज़ीज़ है….ए जाने-वफ़ा….
दिल को तेरी ही तलब हो…तो मनाएं कैसे…..

तुम जो खुश रहने को कहते हो…सब अच्छा है…
उल्फत ख़ाक-ऐ-सपुर्द हो तो …ईद मनाएं कैसे…..

कौन है छाँव किये बैठा……मेरी कबर पे आज….
बाढ़ अश्कों की डुबो देगी…..उसको रोकें कैसे…

मैं ना कहता था कभी भूल ना पाओगे मुझे…..
ना हुआ ‘बब्बू’ तो… बकर-ईद मनाओगे कैसे….

मेरी कश्ती मेरी पतवार थी…सब तेरे लिए….
मौज तेरी ही में जो डूबा है…तो बचाऊँ कैसे….
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/सी.एम. शर्मा (बब्बू)

15 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 26/04/2016
  2. babucm 26/04/2016
  3. Shishir "Madhukar" 26/04/2016
    • babucm 27/04/2016
  4. MANOJ KUMAR 27/04/2016
    • babucm 27/04/2016
  5. अरुण जी अग्रवाल 27/04/2016
    • babucm 27/04/2016
  6. Meena bhardwaj 27/04/2016
    • babucm 27/04/2016
    • babucm 27/04/2016
  7. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/06/2016
    • babucm 25/06/2016
  8. mani 25/06/2016
    • babucm 25/06/2016

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