आजादी

मेरा वतन आजाद है ,मुझको न आज़ादी मिली
सर उठाकर उठाकर चल सकूं वो राह क्यूं न बन सकी
मेरा ……….
कितनी कलियों को खिज़ा खिलने से पहले खा गयी (कन्या भ्रूण हत्या)
और कुछ ऐसे खिली कि फूल वो न बन सकी (दामिनी इन्ही में से एक थी)
मेरा ………
कह दिया देवी कभी तूने मुझे दासी कहा
तेरी नज़रों में कभी इन्सान मै न बन सकी
मेरा ……….
कहते हो सरे जहाँ से अच्छा हिंदोस्तान को
हर गली हर मोड़ पर मुझको यहाँ दहशत मिली
मेरा ……
बदलो इस तस्वीर को मेरे वतन के लाडलों
फिर किसी बेटी के आंसू से न भीगे ये जमीं

मेरा …

7 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 25/04/2016
    • rachana 26/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" 26/04/2016
  3. rachana 26/04/2016
  4. babucm 26/04/2016
    • Rachana sharma 26/04/2016
  5. अरुण जी अग्रवाल 26/04/2016

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