अकालग्रस्त

ज़िन्दगी होती है अकालग्रस्त
जब खुशियों की जमीं
लगती है दरकने
उत्साह के वृक्ष से
झरने लगती हैं
उम्मीद की पत्तियां
रिश्तों की छाँव
दबे पांव
खिसक जाती है
रह जाती है
स्वार्थ की धूप
तब अपनेपन की भूख
और प्रेम की प्यास
करती है व्याकुल
पर ज़िन्दगी…ज़िन्दगी है
इसलिये मरती नहीं है
करती है इन्तज़ार
प्यार भरे बादल का
जिसके आने पर
बरसने लगती हैं
ख़ुशी की फुहारें
और भीगी जिंदगी
मचल उठती है
फिर से….
जीने के लिए….

6 Comments

  1. Anuj Tiwari 25/04/2016
    • Rachana sharma 25/04/2016
  2. Shishir "Madhukar" 26/04/2016
  3. babucm 26/04/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 26/04/2016
  5. Archana 27/04/2016

Leave a Reply