कलि को फूल बनते देखा है ……..

मैंने कलि को फूल बनते देखा है
काँटों के दामन में घिरे होने के
बाबजूद भी खिलखिलाते देखा है
मैंने ऐसी एक कलि को फूल बनते देखा है !!

अत्यन्त जटिल, बहुत कठिन
कैसे कैसे जुल्मो से हो शिकार
विकृत मानसिकता से ग्रसित
बहुसंख्यक कुदृष्टि को झेला है
मैंने ऐसी एक कलि को फूल बनते देखा है !!

निश दिन होकर कोई आकर्षित
उसके कोमल तन को स्पृश करता
व्यथित हो, पीड़ा सहती अंतर्मन में
फिर भी नित प्रवृत्त उसे होते देखा है
मैंने ऐसी एक कलि को फूल बनते देखा है !!

गर्भ से ही थी उपेक्षा की शिकार
चाहत भी सृष्टि को थी उसकी अपार
विविघ स्वरुप में भोगी जाती रही जो
उसे निज चरणों में अर्पण करते देखा है
मैंने ऐसी एक कलि को फूल बनते देखा है !!

पुष्प हो कोई, वृक्ष का, या घर का
कलि स्वरुप जीवन होता बेटी का
असीम विपत्तियों से करके द्वन्द युद्ध
उसे जीवन में निरन्तर बढ़ते देखा है
मैंने एक कलि को फूल बनते देखा है !!

लालच और वहशीपन के दरिंदो की शिकार
कितनो को अपना अस्तित्व खोते हुए देखा है
कई आशियानों में उनका दम घुटते देखा है
ऐसी कई कलियों को धूमिल होते देखा है
मैंने ऐसी एक कलि को फूल बनते देखा है !!

सदियों से किया व्यतीत कष्टों का जीवन
हर ऋतू के दंश को शालीनता से झेला है
कैसे घर आँगन की कलि बन जाती है फूल
इन तथ्यों पर किसने कृपा दृष्टि से देखा है
मैंने ऐसी एक कलि को फूल बनते देखा है !!

फटेहाल पितृ समरूप माली के द्वारा
सुसज्जित होते बागवान की रौनक में
पुष्प कलि संग बेटी को पुलकित होते देखा है
हाँ, मैंने उस कलि को फूल बनते देखा है !!
मैंने ऐसी एक कलि को फूल बनते देखा है !!
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डी. के. निवातियाँ [email protected]@@

18 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 29/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  2. MANOJ KUMAR 29/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  3. प्रियंका 'अलका' 29/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  4. babucm 29/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  5. sarvajit singh 29/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 29/04/2016
  6. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 30/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 30/04/2016
  7. Meena bhardwaj 01/05/2016
    • निवातियाँ डी. के. 01/05/2016
  8. h91sc7 17/05/2018

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