तुम लौट आओ….

यह क्या हो रहा है..क्यूँ हो रहा है…
आंसू छलक रहे हैं…कुछ समझ नहीं आता…
तुम लौट आओ….

दर्द रह रह के उठ रहा है…जिगर चीर सा पड़ा है…
मन के आँगन में…ख़ुशी दफ़न हो गयी है…
तुम लौट आओ…

चराग जल रहे पर रौशनी गुम हो रही है…
तेल भी पानी हो रहा..दीये की बाती बुझ रही है…
तुम लौट आओ…

खून जम रहा है…धड़कन रुक रही है…
सांसें थमने को है..आँखों में लाचारी है…
तुम लौट आओ…

हर खता कबूल कर लेंगे..हर सजा कबूल कर लेंगे…
तुम स्वाति बूँद हो ‘बब्बू’ के प्राण बन जाओ…
तुम लौट आओ…
\
/सी.एम. शर्मा (बब्बू)

4 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 23/04/2016
    • babucm 23/04/2016
  2. MANOJ KUMAR 25/04/2016
    • babucm 25/04/2016

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