*****वक्त का जामुन*******

बचपन में घर के पीछे एक खुशमिजाज रास्ता था
कच्चा, कुछ कांटो के ताज से सजा हुआ
शायद लोग उसे पगडण्डी कहते थे
पगडण्डी ही रही होगी
चलते वक्त ऐसा लगता था मानो जैसे उसने मेरी ऊँगली पकड़ रखी हो
उसी रास्ते पर एक दिन उस से मेरी मुलाकात हुई थी
जामुन के पेड़ के नीचे
लोग उसे रईस कह कर पुकारते थे
लगता है किसी हकीम ने नाम रख था उसका
दिल में हीरा जो छुपा कर रख था उसने

एक सफ़ेद सी टोपी लगाए पेड़ पर बैठा
आने जाने वालो को देखा करता था
शायद किसी जमींदार के पेड़ की रखवाली करता था
एक रोज जामुन के बहाने हमने रिश्ता जोड़ ही लिया उससे
जामुन का था या दोस्ती का ये तो पता नहीं
पर अब बड़ी मुश्किल से मिलता है
मैं जब भी स्कूल से लौटता तो उस से मिलता जामुन भी खाता
रिश्तों की मिठास बढ़ जाती थी जामुन से लिपट कर
खैर जामुन ही तो थे बारह मास पेड़ पर नहीं लगते
या यूँ कह लो दोस्ती सिर्फ जामुन खाने से नहीं होती

कभी कभी मदरसे जाया करता था वो
कुछ अरबी के अलफ़ाज़ भी सीखे थे उसने
मैं पूछता था उस से हरदम बड़े होकर क्या बनोगे
वो मुस्कुरा कर कहता एक दिन ज़मींदार ही बनूगा
नहीं तो तुझे जामुन कौन खिलाएगा

कुछ साल गुजरे, रंग बदला , कुछ शरीर का मिज़ाज़
शायद ज़िंदगी की दौड़ ही कुछ ऐसे थी
की जीतने वाली पट्टी दिखाई ही नहीं पड़ती थी

अब मीलों दूर एक और रास्ता है जो सिर्फ गुजरता है घर से मंजिल की तरफ
पर हाथों की उँगलियाँ नहीं पकड़ता
किनारे कहीं ठेले पर जामुन तो दिखते है पर पेड़ नहीं
तो वही रईस याद आता है
जिसने पहले दिन जामुन तो खिलाए थे
पर पचास जामुन के पच्चीस पैसे भी लिए थे
वो पैसे भी कितने अजीब थे जो
जो कई सालो तक सिर्फ पच्चीस पैसे ही बन कर रह गए

ईद के एक दिन रास्ते में मुलाकात हुई थी उस से
सजदे में जा रहा था अजान सुनकर
अभी भी टोपी सफ़ेद ही थी
पर बालों का रंग काला न था
वक्त का रंग चढ़ गया था बालों पर
या टोपी अपना असर दिखाने लगी कौन जाने
खैर
मैंने पूछा मियां अब क्या मांगने निकले हो खुदा से
और पूछता भी क्या इसके सिवा
मस्जिद की सीढ़ियों पर चढ़कर हसता हुआ बोला
दो गज ज़मीं मांगने निकला हूँ तुझे नए पेड़ के जामुन जो खिलाने है

कल सुना था उसके मोहल्ले में आंसुओं से कुछ ज़मीं गीली हो गई है
आज वो सचमुच का ज़मींदार है दो गज़ ज़मीं का ही सही
उसी ज़मीं पर आज मैंने एक पौधा लगाया है जामुन का
उसको गर्मी की तपिश से बचाने के लिए
या फिर जामुन की कीमत चुकाने के लिए
…………..कौन जाने ……………………….

6 Comments

  1. babucm 23/04/2016
    • shishu 23/04/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 23/04/2016
    • shishu 23/04/2016
  3. Shishir "Madhukar" 24/04/2016
    • shishu 25/04/2016

Leave a Reply