चार दिन कि जिंदगानी…………

किसी की चाहत रखना कोई गुनाह नही
इसकी दिल को ना सजा दीजिये !
कब तक छुपाओगे जज्बातो को दिल मे,
अब तो लबो को हिला दीजिये !!
चार दिन कि जिंदगानी है,कुछ ख़ुशी के साथ,
कुछ गम के नाम गुजर जानी है !
किसने जाना कौन साँस हो आखरी इसलिये
हर पल को रंगीन बना लीजिये ….।।

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डी के. निवातियाँ [email protected]

18 Comments

  1. Meena bhardwaj 27/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
  2. babucm 27/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
  3. Shishir "Madhukar" 27/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
  4. Hitesh Kumar Sharma 27/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
  5. प्रियंका 'अलका' 27/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
  6. anuj tiwari 27/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
  7. sarvajit singh 27/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 27/04/2016
  8. Rajeev Gupta 28/04/2016
  9. निवातियाँ डी. के. 28/04/2016
  10. MANOJ KUMAR 28/04/2016
    • निवातियाँ डी. के. 29/04/2016

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