गुलाम – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

गुलाम

गुलाम बन के …………………….
हम राज करते हैं हसीनों के दिल पे
वरणा शहंशाहों को भी हमने …………
मोहब्बत से महरूम देखा है

शायर : सर्वजीत सिंह
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4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 16/04/2016
    • sarvajit singh 16/04/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 16/04/2016
    • sarvajit singh 16/04/2016

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