== * तनहा था शशि …………. * ==

तनहा था शशि चांदनी मिल गई
अँधेरी रात को रोशनी मिल गई
क्या करू गिला मै कुछ भी नही
रूठी थी सड़क मंजिल मिल गई

तनहा था शशि ………….

फिर न जाने क्यू बढ गये फासले
देखे जो सपने मैने बिखरणे लगे
क्या हुई खता जो रोशनी रूठ गई
हसरते भी दिलके अब हारणे लगे

तनहा था शशि ………….

रूठ गई आरजू खो गया आसमां
जोडे थे रिश्ते कभी अब छुटने लगे
फिर वही दौर लौटा है गुजरा हुवा
पल जो भूल गये थे याद आणे लगे

तनहा था शशि ………….
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✍शशिकांत शांडिले, नागपूर
भ्र. ९९७५९९५४५०
Tanha Tha Shashi

4 Comments

  1. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 13/04/2016
    • SD 16/04/2016
  2. sarvajit singh 14/04/2016
    • SD 16/04/2016

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