आँखों के रस्ते – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

आँखों के रस्ते

उनकी आँखों के रस्ते से …………….
उनके दिल में उतर जाते मगर ………….
दो इंच मोटा चश्मा चढ़ा रखा था ………..
ज़ालिम ने अपनी मृगनयनी सी आँखों पर

शायर : सर्वजीत सिंह
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2 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 08/04/2016
    • sarvajit singh 09/04/2016

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