गुनाह – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

गुनाह

हुस्न को देख कर …………..
इक गुनाह करने का दिल करता है
के सजदा कर लूँ में उसको ………..
खुदा की हर इबादत से पहले

शायर : सर्वजीत सिंह
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4 Comments

  1. krishan saini 30/03/2016
    • sarvajit singh 30/03/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 30/03/2016

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