प्रीतम प्रिया की होली

जब प्रेम टपकता हो आँखों से
और एक आकर्षण हो बोली में
तब ही तो आनंद है आता
प्रीतम प्रिया की होली में

जब रंग लगाती है गोरी
दोनों हाथों से माथे पे
कह देती है साजन से वो सब
जो कह ना पाती वो बातों में

प्रीतम भी अपनी प्रिया की
मन की बात सुन लेता है
उसके गालों पे रंग लगा
सारी सहमति दे देता हैं

भावों की इस बातचीत से
मन को ठंडक जो मिलती है
वो तो कभी नहीं मिलती
माथे पे चन्दन रोली से

जब प्रेम टपकता हो आँखों से
और एक आकर्षण हो बोली में
तब ही तो आनंद है आता
प्रीतम प्रिया की होली में

शिशिर “मधुकर”

10 Comments

  1. sarvajit singh 24/03/2016
  2. Shishir "Madhukar" 24/03/2016
  3. निवातियाँ डी. के. 26/03/2016
    • Shishir "Madhukar" 26/03/2016
  4. सुरेन्द्र नाथ सिंह कुशक्षत्रप 25/04/2016
    • Shishir "Madhukar" 25/04/2016
  5. babucm 25/04/2016
    • Shishir "Madhukar" 25/04/2016
  6. अखिलेश प्रकाश श्रीवास्तव 17/07/2016
    • Shishir "Madhukar" 17/07/2016

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