कुछ

कुछ दबी हुई ख़्वाहिशें है
कुछ मंद मुस्कुराहटें
कुछ खोए हुए सपने है
कुछ अनसुनी आहटें
कुछ दर्द भरे लम्हे है
कुछ सुकून भरे लमहात
कुछ थमें हुए तूफ़ाँ हैं
कुछ मद्धम सी बरसात
कुछ अनकहे अल्फ़ाज़ है
कुछ नासमझ इशारे
कुछ ऐसे मझदार हैं
जिनके मिलते नहीं किनारे
कुछ उलझनें है ज़िंदगी की
कुछ कोशिशें बेहिसाब
कुछ ऐसे सवालात हैं
जिनके मिलते नहीं जवाब

निशा

2 Comments

  1. Saviakna 23/03/2016
    • निशा 23/03/2016

Leave a Reply