जीवन के मोड़

जिन्दगी में कभी कभी ऐसे मोड़ आते हैं।
जो इंसान का जोश और जूनून तोड़ जाते हैं।।
रिश्ते और नाते भी सब साथ छोड़ जाते हैं।
आकुल मन को और झकझोड़ जाते है।।
धैर्य की भी विकट परीक्षा होती है।
करना पड़ता है वो काम जिसकी तनिक भी इच्छा नहीं होती है।।
सब्र का भी जब बाँध टूटने लगता है,।
उम्मीदों का भी सूरज ढ़लने लगता है।।
समय चक्र भी प्रतिकूल जान पड़ता है।
आदमी को उसी के अनुरुप ढ़लना पड़ता है।।
परिस्थिति इस कदर मजबूर कर देती है।
लक्ष्य से मीलों कोसों दूर कर देती है।।
असफलताओं का भी स्वाद चखना पड़ता है।।
स्थिति को भाँप दिन रात लड़ना पड़ता है।
परिणाम को भी सोचकर डरना पड़ता है।।
ऐसे में जरुरत होती है केवल मन को समझाने की।
फूँक-फूँक कर एक एक कदम बढ़ाने की।।
जिन्दगी की तो रीति ही ऐसी होती है।
लेकिन डर के आगे तो जीत निश्चित होती है।।

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 20/03/2016
    • Manohar 23/03/2016

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