क्यों है –(ग़ज़ल)

हर किसी ने दिल में बदरंग तस्वीर उतारी क्यों है
आज मुल्क में मोहब्बत पर नफरत भारी क्यों है

मजहब की चादर से अमन धुल सा गया है
और आज का इंसान नफरत का पुजारी क्यो है

जिस मुल्क के रुखसार पर चमकते थे चाँद सितारे
वहां चौदहवी की रात आज अंधियारी क्यो है

पूरी दुनिया में शांति की मिशाल थे हम
फिर अपने ही घर में कत्लेआम जारी क्यों है

सुना है दिल का अमीर होता है हर हिंदुस्तानी
फिर हर शक्श मोहब्बत बांटने में भिखारी क्यों है

जीती थी हमने इस जहाँ में दिलों की हर बाजी
फिर अमन चैन के खेल में अपनी हार करारी क्यों है

देता है जो मुल्क दुनिया को पैगाम ऐ मोहब्बत
फिर अपने मुल्क से गद्दारी की तैयारी क्यों है

हितेश कुमार शर्मा

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 18/03/2016
    • Hitesh Kumar Sharma 18/03/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 18/03/2016
    • Hitesh Kumar Sharma 18/03/2016

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