||अश्को का जीवन ||

“कुछ दर्द पुनः जो आँखों में
आंसू बनके आ जाते है
जो अल्फाज बयां न हो लब्जो में
उनको सहज ही बतलाते है ,
शिशक-शिशक उन बातों का रोना
दिल का दर्द बताता है
लब्जो में वो रुंधे शब्द
दर्द बहुत बढ़ाता है,
वो छोटी बुँदे अश्को की
अधखुली मुस्कान वो चेहरे पे
हो जाये बंद जब लब्जो के पट
बहते उन अश्को के झरने पे ,
कुछ बीती बयारें जो सामने आये
अश्को के बादल भरके लाये
कर महफ़िल में तनहा मुझको
गम के सागर में नहलाये ,
वो अधूरे वादे और कस्मे सब
जब तिल-तिल जिन भारी करदे
मौत रूठे जिंदगी से चंद बातों में जब
मुस्कान लबों से दूर जो कर दे ,
बिखरे गेसू और लैब पर आंहे
और यादों में खुद को बिसराये
थम जाये मंझधार में जीवन की नाव
रहम ना एक पल जब उसपे आये ,
भारी पड़ जाये जब दिल पे पुनः
बिता कल उन बिछड़े रिश्तों की
उमड़ पड़ता है फिर अश्को का सैलाब
लेके याद उन गुजरे पलो की ||”

One Response

  1. Shishir "Madhukar" 11/03/2016

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