मुसाफिर – मेरी शायरी……. बस तेरे लिये

मुसाफिर

कई बार वो टकराये तो में समझा के मोहब्बत कर बैठे
पर मुझे मालूम ना था भटके हुए मुसाफिर हैं वो ……..
रस्ते की तलाश में

!
!
!

शायर: सर्वजीत सिंह

4 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 01/03/2016
    • sarvajit singh 01/03/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 02/03/2016
    • sarvajit singh 02/03/2016

Leave a Reply