बेईमान – शायरी – अरिता सर्वजीत

ऐसी मान्यता है की ढलते हुए सूरज को अपने दुःख दर्द अपनी तकलीफें, बीमारी, अपनी मुसीबतें ले जाने को बोलो तो वो खत्म हो जाती हैं

बेईमान

जब मैंने ढलते हुए सूरज को
अपने दुःख दर्द ले जाने को कहा
तो वो हंस कर बोला ——–
संभाल के रख कल फिर आऊंगा

!
!
!

लेखिका : अरिता सर्वजीत

2 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 28/02/2016
  2. sarvajit singh 28/02/2016

Leave a Reply