“क्रांतिकारी वीर- चंद्रशेखर आजाद”

हारा नहीं…डरा नहीं , अटल रहा अडिग रहा ….
मौत थी सामने खड़ी ,फिर भी न चेहरे पर सिकन उगा ….
क्रांतिकारी वीर था …दुश्मनों के लिए वो धारदार तीर था….
कोड़ों की बरसात पर वन्दे मातरम्‌ का नारा लगाता…
जज के सवाल पूछे जाने पर अपना नाम आजाद, पिता को स्वतंत्रता
और जेल को निवास बताता …..
आजादी की चिंगारी को कभी बुझने न दिया….
अपने लिए संकल्प को कभी टूटने न दिया ….
अंग्रेजो के हाथों फाँसी लेना
भारत माँ से गद्दारी करने के बराबर समझी….
खुद को अपने आजाद हाथों से गोली मार
मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी …..
हल ढूंढते रह गए फिरंगी पर जान न पाये उसे
क्यूंकि आजाद तो खुद में एक सवाल था…
भारत का सपूत आजाद बेमिसाल था….
वीर सपूत आजाद के पुण्यतिथि पर विनम्र श्रद्धांजिली….

6 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 27/02/2016
    • Ankita Anshu 27/02/2016
  2. Shishir "Madhukar" 27/02/2016
  3. Ankita Anshu 27/02/2016
  4. Sonu Sahgam 27/02/2016
  5. anuj tiwari 05/03/2016

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