बेनकाब – मेरी शायरी……. बस तेरे लिए

बेनकाब

दिल की हर कली खिलके गुलाब हो जाती
शबनम तेरे चेहरे पे पड़के शराब हो जाती

दिल की हर कली खिलके गुलाब हो जाती
शबनम तेरे चेहरे पे पड़के शराब हो जाती
पतझड़ में खिल जाते गुन्चे हर शाख पर
अगर तेरी सूरत…… बेनकाब हो जाती

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लेखक : सर्वजीत सिंह
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5 Comments

  1. डी. के. निवातिया निवातियाँ डी. के. 27/02/2016
  2. Shishir "Madhukar" Shishir "Madhukar" 27/02/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 27/02/2016
    • sarvajit singh sarvajit singh 27/02/2016
  3. Pankaj Charpe 28/02/2016

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