||एक जवान की व्यथा ||

सम्बोधन में शहीदों ने अपने
कुछ इतर शब्द मांगे है आज
ना कहना मुझको देशभक्त
कुछ ऐसा सन्देश सुनाया है आज ,

जब गद्दार देशभक्त हो जाते है
और आतंकी शहीद कहलाते है
फिर कौन सा शब्द उपयुक्त हो हमपे
खोज में इसके जुट जाते है ,

वीरों के शहीद होने पे
ना छाती पिटी जाती है
ना दौरे होते घर के उनके
ना आंसू पोछी जाती है,

ना कभी भी कोई मीडिया दल
शहीदी पे उनके कवरेज बनाता
काँटते गर्दन जो भारतियों के
उन्हें ही अपना विधाता बताता,

ना राजनेताओं के पापी मुख से
श्रद्धांजलि के शब्द सुनाई देते
कर बंद दो पल को अपनी आँखे
ना कोई अंतिम विदाई है देते ,

हे माँ भारती करना माफ़ मुझे
कर इतनी सेवा हम चलते है
दी थी साँस उस खुद ने जितनी
कर अर्पण तुमको चलते है || “

2 Comments

  1. Vijay yadav 18/02/2016
  2. omendra.shukla 19/02/2016

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