“सीख”

जीवन पथ
घनघोर अँधेरा
चलता चल

ऊँचे पर्वत
निर्जन उपवन
चलता चल

कठिन लक्ष्य
श्रम तेरी मंजिल
चलता चल

शुभ्र चाँदनी
है तेरी प्रदर्शक
चलता चल

तेरी साधना
अरुणोदय वेला
चलता चल ।।

“मीना भारद्वाज”

4 Comments

  1. omendra.shukla 12/02/2016
  2. Meena bhardwaj 12/02/2016
  3. Shishir "Madhukar" 12/02/2016
  4. Meena bhardwaj 13/02/2016

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