==* बोल सजनी *==

नयन तेरे क्यू भिगे भिगे
बोल जरा सजनी
क्या है तेरे मनके अंदर
राज वो सारे खोल

बोल सजनी सजनी सजनी
कुछ तो अब तू बोल
दर्द समंदर पिनेसे अच्छा
दर्द तू अपने खोल

रोती हुई तू जचती नही है
बीत गया वो भूल
बोल जरासी मुझसे अपने
दिलके भेद तू खोल

बोल सजनी सजनी ——

पता है तेरे मन मंदिरमे कुछ
उठ रहा है शोर
हसते खेलते इस जीवनमे
जहर अब न घोल

बोल सजनी सजनी ——

क्या हुवा गर सितम कर गई
जिंदगी हर रोज
रो मत पगली संभल तू खुदको
हसके अब तू बोल

बोल सजनी सजनी सजनी
कुछ तो अब तू बोल
दर्द समंदर पिनेसे अच्छा
दर्द तू अपने खोल
———
शशिकांत शांडिले (SD), नागपूर
भ्र.९९७५९९५४५०
दि.१३/०१/२०१६
Bol Sajni

5 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 14/01/2016
  2. Er. Anuj Tiwari"Indwar" 14/01/2016
  3. SD 15/01/2016
  4. omendra.shukla 15/01/2016
  5. SD 01/03/2016

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