“मेरी क़लम भाग-17” डॉ. मोबीन ख़ान

पन्नों पर अपनी मुलाकात की तारीख लिखता हूँ।
हौसलों में शेर से भी ज़्यादा ज़िगर रखता हूँ।।

छोड़ दे हर घड़ी ज़माने की फ़िक्र करना,
पैर ज़मीं पर हैं पर आसमान छूने की हुनर रखता हूँ।।

मैं वो नहीं ज़ो इतिहास के पन्नों में दफ़न हो जाऊं,
दुश्मनोँ को दफ़्न करने की क़ुव्वत रखता हूँ।।

5 Comments

  1. नरेन्द्र कुमार 10/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan 10/01/2016
  2. Meena 10/01/2016
    • Dr. Mobeen Khan 10/01/2016
  3. अभ्‍िाषेक शर्मा 12/01/2016

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