मुक्तक-संवर जाओगे- शकुंतला तरार

”संवर जाओगे”
हमारी ज़ुल्फ़ के साये में संवर जाओगे ,
हमारी आँख के काजल में ठहर जाओगे ,
जो फूल बनके घर-घर में महकना चाहो ,
हमारे प्यार की खुशबू से निखर जाओगे ||
शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)

12 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 08/01/2016
    • shakuntala tarar 09/01/2016
      • shakuntala tarar 09/01/2016
  2. निवातियाँ डी. के. 08/01/2016
    • shakuntala tarar 09/01/2016
      • निवातियाँ डी. के. 09/01/2016
    • shakuntala tarar 05/02/2016
  3. asma khan 08/01/2016
    • shakuntala tarar 09/01/2016
  4. निवातियाँ डी. के. 09/01/2016
  5. salimraza 09/01/2016
    • shakuntala tarar 05/02/2016

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