उम्मीद नए साल की

लो यू ही एक और साल हो गया व्यतीत
और बढ़ चला है आप अपना अतीत

हर साल इक नया साल आता ही रहेगा
इच्छाओं का दीपक हर दिल मे जलता ही रहेगा

बूँद – बूँद मिलकर यादो का सागर बनता रहेगा
साहिल मन अब और कितने तुफानो को और सहेगा

शायद पुराने रिश्तो की आग को कोई अब हवा दे
बुझी हुई चिंगारी की राख कोई अब दिल से हटा दे

दिल के अँधेरे मे चाहत की रौशनी हो तो बात बने
कोई इस दिल मे आन बसे तो नए साल की सौगात बने

नया साल आया और पुराना गया, ये तो अक्सर होता है
पर हर साल उम्मीद टूटना, दिल मे नस्तर चुभोता है

मिलन की हरियाली से ये साल सदाबहार बने
खुशियों के खरीददारों से, खुशहाल सारा बाजार बने

करो दुआ सब, कि चाहत के फूल हर दिल मे खिले
नए साल पर सब नफरत भूल, प्रेम से गले मिले

हितेश कुमार शर्मा

2 Comments

  1. omendra.shukla 29/12/2015
    • Hitesh Kumar Sharma 29/12/2015

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