आज फिर माँ की याद आई है

आज फिर माँ की याद आई है
जन्नत से सुकून की बारात लायी है

पोछे जो धूल में लिपटे हुए वो नन्हे आँसू
आँखों में फिर अमृत की बरसात लायी है

आज फिर माँ की याद आई है

उन क्यारियों की सूखी डालियाँ खिल उठती हैं
देख मालिन आज खाद लायी है

आज फिर माँ की याद आई है

रोटी पा कर उदास आँखों ने देखा इस कदर
बुझे दिये में जैसे लौ बड़े दिनों बाद आई है

आज फिर माँ की याद आई है

लोरियाँ गा कर सुलाती थी माँ जैसे
मीठी बयार और पीपल की छात छाई है

आज फिर माँ की याद आई है

बहके कदम को थाम कर साकी ने जाम में
आँचल के उस मीठे कोने का स्वाद पाई है

आज फिर माँ की याद आई है

पत्थर की ठोकर भी प्यारी लगी मुझे
जैसे शरारत पर किसी खूब डांट खाई है

आज फिर माँ की याद आई है

लेट कर अर्थी पर अपने खुश हूँ ऐसे
सिर पर आशीष जैसे माँ की गोद पाई है

आज फिर माँ की याद आई है

5 Comments

  1. asma khan 15/12/2015
    • Uttam 16/12/2015
  2. निवातियाँ डी. के. 15/12/2015
    • Uttam 16/12/2015
  3. shalu verma 16/12/2015

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