स्वार्थ के साथी – शिशिर “मधुकर”

देके जिन्हे हम अपना सब कुछ घर में लाते हैं
वोही अक्सर ना जाने क्यों दिल को दुखाते हैं
बचा है कुछ ना अब मेरा ये साँसें भी तुम्हारी हैं
कोई भी साथ ना देगी तुम्हे हस्ती जो प्यारी हैं
नहीं है बात ये मेरी ये तो सच है ज़माने का
सभी हैं स्वार्थ के साथी नही कोई काम आने का
जिन्हे तुम देख के दिन रात अपना चैन खोती हो
ना फिर होगा कभी ये मस्त मौसम मुस्कराने का
वहाँ थे और भी योद्धा स्वयंवर जीत जो लेते
पर वक्त ने भेदन कराया अर्जुन से निशाने का
जो मिलता है उसे भगवान की इच्छा समझ लेलो
यही एक रास्ता है ढेर सारी खुशियाँ पाने का

शिशिर “मधुकर”

6 Comments

  1. Raj Kumar Gupta 12/12/2015
  2. Shishir "Madhukar" 12/12/2015
  3. asma khan 13/12/2015
  4. Shishir 13/12/2015
  5. Uttam 13/12/2015
  6. Shishir 13/12/2015

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