“रोटी” डॉ. मोबीन खान

गरीबों को दो वक्त की रोटी से मतलब है।
इन्हें मजहब के नाम पर मत लड़ाओ।।

ज़मीर तेरा भी नहीं राज़ी होगा इस कत्लेआम के लिए।
अपने ईमान को थोड़ा तो जगाओ।।

किस को मिली है कामयाबी नफरत फैलाकर।
अगर दामन में मोहब्बत है तो जी खोलकर लुटाओ।।

गरीबों को दो वक्त की रोटी से मतलब है।
इन्हें मजहब के नाम पर मत लड़ाओ।।

हर तरफ खुशियां फैलाना कोई नामुमकिन काम नहीं।
अपने होठों पर एक खूबसूरत मुस्कान तो लाओ।।

यह मुल्क़ हम सबका एक घर ही तो है मोबीन।
इसकी शान की खातिर हर ज़ख्म जिस्म पर सह जाओ।।

गरीबों को दो वक़्त की रोटी से मतलब है।
इन्हें मज़हब के नाम पर मत लड़ाओ।।

10 Comments

  1. Shishir "Madhukar" 10/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan 10/12/2015
  2. Tamanna 10/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan 10/12/2015
  3. निवातियाँ डी. के. 10/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan 10/12/2015
  4. Bimla Dhillon 11/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan 11/12/2015
  5. नितिश कुमार यादव 12/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan 12/12/2015

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