“अश्क”डॉ. मोबीन ख़ान

जहान की ऐसी हालत देखकर,
आंखों में अश्क आ ही जाते हैं।

कितना खुद को झूठी दिलासा दूँ,
ये हालात सच बता ही देते हैं।

अब बर्दास्त नहीं होता ये हाल ज़माने का,
रास्ते खुद इनकी हक़ीक़त बता ही देते हैं।

कब तक ये जहान ज़लता रहेगा आग में,
ये उठते हुए दुऍ सच बता ही देते हैं।

तू रूठा है इस ज़माने से क्यू ख़ुदा,
इसकी वज़ह वो उजड़े हुए मकान बता ही देते हैं।

तुम्हीं उस अज़ीम मोहब्बत की सुरुआत करो मोबीन,
तेरी ये नज़रें उन ख्वाबों की हक़ीक़त बता ही देते हैं।

2 Comments

  1. sandeep 09/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan 09/12/2015

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