“इन्सान” डॉ. मोबीन ख़ान

इंसान को इंसान नहीं।
हैवान समझते हो।।

जो रख लूँ सिर पर पगड़ी।
सरदार समझते हो।।

जो लगा लूँ माथे पर टीका।
हिन्दू समझते हो।।

इंसान को इंसान नहीं।
हैवान समझते हो।।

ज़ो रख लूँ लंबी ढाढ़ी।
मुसलमान समझते हो।।

ज़ो कह दे सच तेरा।
उसे शैतान समझते हो।।

इंसान को इंसान नहीं।
हैवान समझते हो।।

4 Comments

  1. Rakesh kumar 05/12/2015
  2. निवातियाँ डी. के. 05/12/2015
    • Dr. Mobeen Khan 05/12/2015
  3. Swetarchi 05/12/2015

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