तनहाई

आँखे मुंदती हूँ तो कोई ना दिखे
आँखे खोलती हूँ तो परछाई ना दिखे
यह कैसी तनहाई है मेरे अपने ना दिखे
आँखे नम है पर आंसू न पोछते हाथ दिखे
यह कैसी बेबसी है किसी को ना दिखे
बढाती हूँ हाथ अपनों को पाने क्योँ किसी को ना दिखे
दर्द के मारे झुकाती हूँ हाथ ना जाने क्योँ सभी को दिखे
वो बहन का प्यार वो भाई का दुलार ना जाने क्योँ सपनों में मुझे ही दिखे
पूछता है दिल बार बार क्यों मुझ जैसी बहन तुम्हे कोई ओर दिखे
– काजल / अर्चना

2 Comments

  1. rajesh vaushnav 05/12/2015
    • kajal 05/12/2015

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