मुक्तक -“माँ “- शकुंतला तरार

“माँ”

सर जहां पर झुके वो मां के चरन
तीर्थ कहते जिसे वो मां के चरन
जिसके चरणों की धूल से जीवन
धाम बन जाये उस मां को नमन ||
शकुंतला तरार रायपुर (छत्तीसगढ़)

4 Comments

  1. asma khan 03/12/2015
  2. Shishir 03/12/2015
  3. sukhmangal singh 04/12/2015
  4. kajal 04/12/2015

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