मेरा शहर (हाइकू)

मेरा शहर
प्रदूषित शहर
होता कहर

जीना मुश्किल
अशांति चारों ओर
रैन या भोर

धन के लिए
मानवता मरती
धोखा करती

स्वार्थी हैं सब
हो रही कमजोर
रिश्तो की डोर

सुरक्षा नहीं
होते हैं बलात्कार
आम है बात

भूले आदर्श
पैसा है भगवान
और महान

है अपमान
कैसी है मेरी दिल्ली
उड़ाते खिल्ली

हितेश कुमार शर्मा

3 Comments

  1. asma khan 30/11/2015
    • Hitesh Kumar Sharma 30/11/2015
  2. निवातियाँ डी. के. 30/11/2015

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