दुनिया करेगी याद – शिशिर “मधुकर”

टूटा सदा ये दिल जहाँ जुड़े थे मेरे जज़्बात
क्या होता इस सफर में आते ना जो तुम साथ
लोगों ने जी भर लूटा मन का मेरे विश्वास
धोखा था इतना सच्चा ना हो सका एहसास
उसका करम था मिल गए तुम इस सफर के बीच
तन्हाई की गहराई तब हमको सकी ना खींच
फिर खिल उठे हैं दिल के इस गुलशन में ढेरों फूल
तुमसे अरज है भूल कर भी ना हमको जाना भूल
अब गिरे तो फिर ना संभल पाएंगे कभी
है कोई भी शिकवा अगर वो कह दो तुम अभी
इतना तो तय है पीछे हमारे दुनिया करेगी याद
हमने सदा लुट कर किये हैं दूजों के घर आबाद.

शिशिर “मधुकर”

7 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 26/11/2015
    • Shishir "Madhukar" 26/11/2015
  2. asma khan 26/11/2015
    • Shishir "Madhukar" 26/11/2015
  3. Manjusha 26/11/2015
  4. Girija 27/11/2015
  5. Shishir "Madhukar" 27/11/2015

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