दर्द

गुलज़ार कहते है
खुशी फूलझड़ी सी होती है
रोशनी बिखरती झट से खत्म हो जाती है

दर्द देर तक महकता है
भीतर ही भीतर सुलगता है
उसकी खुशबू जेहन में देर
तक रहती है

ख़ुशी को भी हम
दर्द भर कर अहा से याद करते है
क्योंकि दर्द ही देर तक ठहरता है
दर्द यादों में जम जाता है
पिघलता है आंसू बन
कभी हंसी में बिखर जाता है

क्योंकि दर्द ही देर तक ठहरता है

10 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 24/11/2015
  2. sushil 24/11/2015
    • Rinki Raut 25/11/2015
  3. Gurpreet Singh 24/11/2015
    • Rinki Raut 25/11/2015
  4. asma khan 25/11/2015
    • Rinki Raut 25/11/2015
  5. Shishir "Madhukar" 25/11/2015
    • Rinki Raut 25/11/2015

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