यादों के झरने

तुम्हारी यादों ने खाई खोद डाली है पाषाणों से दिल पर
प्रपात बन कर बह निकलती है मुंडेरों से आँखों के
मन उद्वेलित हो जाता भावनाओं के बवंडर में
जब शोर करते हैं बिछड़े पल वो अरमानों के
दिल शकुन में नहा जाता है उस निर्झर के छींटों से
हर बूँद जिसकी भीगी हुई होती है तेरी मीठी बातों से
हर शाम जब भी तूफान गहराते हैं जीवन के नाव में
सुस्ता लेता हूँ कुछ देर यूँ ही उस निर्झर के छाँव में

4 Comments

  1. Girija 23/11/2015
  2. vijay jain 23/11/2015
  3. Shishir "Madhukar" 24/11/2015
  4. निवातियाँ डी. के. 24/11/2015

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