“राज़नीति” डॉ. मोबीन ख़ान

गरीबों को कहां फ़ुर्सत है, मज़हब की राजनीति करने की।
वो तो बस रिज़्क़ की फिक्र में, जिंदगी गुजर करते हैं।।

ज़ो लोग चेहरे पर लगा रखे हैं, रहीशज़ादी का पर्दा।
बस वही लोग मज़हब की राजनीति, करते हुए दिखते हैं।।

2 Comments

  1. sunil kumar 22/11/2015
  2. asma khan 24/11/2015

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