जीवन यात्रा

एक कागज की नाव
बहते बहते मेरे पास आई
भीगी पलकों में धूमिल पड़ती
स्मृतियां छुपाकर लाई
खोल उसकी परतों को
पहचाना उसके गीलेपन का दर्द
सूरज की आग होगी जमीन पर
कह रही हवा सर्द
चीख रहा एक एक शब्द
कागज की बिखरी नाव का
हर एक मुस्कुराता चेहरा
स्मृतियां विस्मृतियां
अनदेखे अनसुने
अंतरंगों का अन्तराल
अबोध बालक का करूण क्रंदन
जीवन यात्रा का प्रश्नकाल
घुटनों के बल पथिक का आरोहण
छोटे छोटे शब्दों का संकेतक
प्रलोभनों का आकर्षण
एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को
तरंगों का सम्बोधन
जीवन के बोझिल पथ पर
यात्राओं का सर्मपण।

………………… कमल जोशी

3 Comments

  1. Shishir 12/11/2015
  2. omendra.shukla 13/11/2015
  3. sukhmangal singh 15/11/2015

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