“मुक़द्दर” डॉ. मोबीन ख़ान

जो सच है ही नहीं, उसे सच कैसे साबित करोगे।
मौत ही मुक़द्दर है, ज़िन्दगी को सच कैसे साबित करोगे।।

तूने मेरी जो तस्वीर बनायी है, वो ग़लत है।
खुदा के घर मुझे गुनेहगार कैसे साबित करोगे।।

4 Comments

  1. Shishir 08/11/2015
    • Dr. Mobeen Khan 19/11/2015
  2. dknivatiya 08/11/2015
    • Dr. Mobeen Khan 19/11/2015

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