||ग़ज़ल सारथी|| दोस्त कोई न मेह्रबाँ कोई

दोस्त कोई, न मेह्रबाँ कोई
काश मिल जाए, राज़दाँ कोई !!

दिल की हालत, कुछ आज ऐसी है
जैसे लूट जाए, कारवाँ कोई !!

एक ही बार, इश्क़ होता है
रोज होता नहीं जवाँ कोई !!

तुम को वो सल्तनत, मुबारक हो
जिसकी धरती, न आसमाँ कोई !!

सारथी कह सके जिसे अपना
सारथी के सिवा कहाँ कोई !!

6 Comments

  1. Ashita Parida 26/10/2015
    • बैद्यनाथ 'सारथी' 27/10/2015
  2. निवातियाँ डी. के. 26/10/2015
    • बैद्यनाथ 'सारथी' 27/10/2015
  3. Shishir 26/10/2015
    • बैद्यनाथ 'सारथी' 27/10/2015

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