उत्साह

आस्मां हरा कर दूं
धरा नील कमल कर दूं
रोक दूं ये पहर
आज मैं क्या से क्या कर दूं
हर सफर तय हो मेरा
हर मंजिल हमसफर मेरी
हर वक्त भाग्य मेरा
हर कली मुस्कान मेरी
तो क्यों न मैं कल को आज कर दूं?

4 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 26/10/2015
    • Girija 26/10/2015
  2. Shishir 26/10/2015
    • Girija 27/10/2015

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