घटती निगाहो ने मुझे परेशान कर दिया
उन अंधेरो को उजाले से रोशन जो करना था
करना जरूरी था क्योंकि
उनके विश्वास पे खरा जो उतरना था
तोड़ न सकते थे उनके विश्वास को
उनसे तग़ाफ़ुल तो न करना था
हमारा खुद का नसीब जर्जर था
फिर भी उनके नसीब का निर्माण करना था
खुद कभी भली नींद न सोये
उनके सारे सपनो को साकार करना था
महज उमीदो के सहारे जिंदगी काट देने वाले
इनकी जिंदगी को नई उड़ान से भरना था !!!!!!!!!!!!!
बहुत ही उत्तम तरीके से आपने मन के भावों को व्यक्त किया है. कृपया मेरी आपकी इस रचना से मिलती जुलती रचना “भारी क्षण” अवश्य पढ़े और अपनी प्रतिक्रिया भेजें.