हमको देश बनाना है – शिशिर “मधुकर”

मैं भारत का वासी हूँ इस देश को दिल से चाहता हूँ
पीडा मन की साझा करने को कुछ कड़वी बात बताता हूँ
दो धर्मों के द्वेष ने था एक दिन इस भूमि को बंटवाया
लेकिन कुछ सत्तालोलुप लोगों ने फ़िर उसी नीति को अपनाया
धर्म को रखकर देश से ऊपर एक ऐसा धोखा कर डाला
देश एक है नियम कई है ये कैसा है गड़बड़झाला
जाति जाति में बाट के सबको कहते हैं ये एक सच्चाई है
क्या ऐसे विघटित समाज की खातिर हमने आजादी पाई है
पिछले सत्तर सालों से जो सामाजिक न्याय का दम भरते है
सत्ता में आकर देखो उनको कैसे काम वो करते है
लोभ की खातिर हमने अपनी सब नदियों को गंदा कर डाला
अब तो बाजार से लेना पड़ता है पानी वो पीने वाला
शहर हमारे बड़े हो गए मगर बनें इतने गंदे
नियमों की धज्जियां उड़ाकर यहाँ नित होते काले धंधे
अपने लोक सेवकों ने तो अंग्रेजों को धता बताई है
उनको सब कुछ हासिल है जनता में त्राहि त्राहि है
हम ही ऐसे देश है जिसने अपनी मेघा को दुत्कारा है
फ़िर भी जाने कैसे कहते है भारत हमको प्यारा है
बोलने की आजादी को हम सबने खूब भुनाया है
बिन सोच समझ के कह डाला जो जिसके मुँह में आया है
ऊँचे न्यायालयों की तो कुछ ऐसी स्थिति बन आई है
उनमे तो केवल पैसे वालों और नेताओं की सुनवाई है
शक्ति की खातिर लड़ते है सब न्याय से कुछ ना लेना है
अभी तो इन हालातों में ही इस देश में हमको रहना है
संचार क्रांति की तो आज आई कुछ ऐसी आँधी है
झूठ को सच बतलाने वालों की तो बस चाँदी ही चाँदी है
अब तो पिछले दरवाजो से वो सरकार चलाते है
कभी कभी तो जिसको चाहे खुलकर वो धमकाते है
इतने सब के बावजूद यदि हमको देश बनाना है
तब कुछ बातों को हम सब को बिना विलम्ब अपनाना है
शिक्षा के नाम पे चलती सब दुकानों को बँद कर दो
सरकारी शिक्षा के द्वारा सारी जनता को सम कर दो
जाति धर्म के नाम पर होते न्याय अन्याय को बँद करो
एक ही भारत है हम सबका नारा यही बुलंद करो
आपस में सम्बन्धों की खातिर धर्मों की ना बाधा हो
धर्म के चौकिदारों की भी मानवता मर्यादा हो
स्वार्थ की खातिर जो करें कुतर्क ऐसे लोगों को पहचानो
इन सब लोगों को दण्डित कर ही देश बदलने की ठानो.

शिशिर “मधुकर”

7 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 20/10/2015
  2. Shishir "Madhukar" 20/10/2015
  3. rajthepoet 20/10/2015
    • Shishir "Madhukar" 20/10/2015
  4. anuj 20/10/2015
  5. Shishir "Madhukar" 20/10/2015
  6. Ashita Parida 27/10/2015

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