परिभाषाएं

ममता को सींच जो यथार्थ खोता है
जो दे प्राण मर्त्य को वो जीवन होता है

वो धुँआ जिसके साए में घुट जाती है आशाएं
जो मानव को मुखौटे में समाये वो कफन होता है

भावनाओं से परे पर जीव को है धरे
जो बोझ है धरा पर, वो पाहन होता है

जो जल कर सृष्टि का आव्हान करता है
विशद प्रेरणा स्रोत बन कर उठा जो हवन होता है

4 Comments

  1. निवातियाँ डी. के. 15/10/2015
    • Uttam 15/10/2015
  2. Shishir 15/10/2015
  3. Hemchandra 17/10/2015

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